chandn ओस में लिपटी एक रात....
तुम्हारे नर्म होठों का ख्याल
आज फिर चूम गया मेरे गालों को
तुम्हारी भीनी-सी साँसों की आवाज़
सुबह-सुबह महका गयी मेरे बालों को
तुम्हारे बदन की चांदनी
रात भर गुदगुदाती रही मुझे
तुम्हारी हथेली की गर्मास
हर करवट पे जगाती रही मुझे
तुम्हारे तलवों की ठंडक
से सिहरती रही मैं
तुम्हारे आग़ोश की गर्मी में
पिघलती रही मैं
अब तक मेरी आँखों में
तेरा अक्स बाकी है
आज भी मेरी आवाज़ में
तेरी रूह जागी है
वो ओस में लिपटी एक रात
ख़ामोशी से सजी सौगात
तुम्हारे मेरे दरमियाँ आज भी है
वो एक अनकही-सी बात
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